Oplus_131104
जवाहर लाल नेहरू मार्ग, सन्निधि, राजघाट, नई दिल्ली-110002

भारत को पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य हासिल करना था। विभिन्न सम्प्रदायों के लोगों की परस्पर समझ, अनेक समुदायों की हार्दिक एकता, जातियों और संस्कृतियों का एक साथ व्यापक समन्वय हो सके इसलिए गांधी के कार्यों का पहला लक्ष्य भारतीय दृष्टि से राष्ट्र का पुनर्निर्माण था। गांधीजी ने उसके लिए ‘रचनात्मक कार्यक्रम का प्रारूप तैयार किया। जिनमें सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषयों के साथ राष्ट्रीय भाषा नीतिभी प्रस्तुत की जिसके अनुसार प्रांतीय भाषाओं के सशक्तिकरण के साथ राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रुपमें हिन्दी-हिन्दुस्तानी भाषा के संवर्घन एवं प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया गया था।

उन्होंने वर्ष 1942 में उपर्युक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’, वर्धा की स्थापना की। उन्होंने इस कार्य के लिए काका साहेब कालेलकर कोचुना। काकासाहेब ने इसी उद्देश्य को व्यापक रुप देने के लिए 1 सितम्बर, 1955 को ‘गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा’, राजघाट, नई दिल्ली की स्थापना की। उन्होंने गांधी प्रणीत भाषा-नीति के राष्ट्रीय भावनात्मक एकता की प्राप्ति के लिए भारतीय भाषाओं में निहित भाषिक, साहित्यिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक बिन्दुओं के समन्वितस्वरों के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रचार-प्रसारका लक्ष्य संस्था को दिया। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सभा द्वारा पिछले सत्तरवर्षों में अनेक प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए गए।

हमारी मुख्य गतिविधियां
Promotion of Indian Languages
भारतीय भाषाओं का संवर्धन
Publications
प्रकाशन
Bodo Study Centre
बोडो अध्ययन केंद्र
Cultural Activities
सांस्कृतिक कार्यक्रम
Constructine Programmes
रचनात्मक कार्यक्रम
Youth Ergurement with Gandhian Ideals
युवा वर्ग में गांधीविचार का प्रसार
Religious Harmany
सर्वधर्म समभाव
Our Associate Organizations
हमारी संबद्ध संस्थाएं