
काकासाहेब कालेलकर
जन्म: 1-12-1885- देहांतः 21-8-1981
संस्कृति चिंतक, शिक्षाशास्त्री, साहित्यिक, तत्त्ववेत्ता, प्रकृति प्रेमी तथा गांधी विचार के चार तत्त्वज्ञों में से एक। आपके साहित्य में अभूतपूर्व विशालता और विविधता है। बहुभाषाविद् काकासाहेब कालेलकर ने हिंदी, गुजराती और मराठी में अबाध साहित्य रचना की, जिसमें साहित्य आस्वाद, धर्म-संस्कृति, शिक्षण-मीमांसा, समाजशास्त्र, यात्रा साहित्य, चिंतन, पत्र आदि सभी समाविष्ट हैं।
दर्शनशास्त्र में स्नातकोपरांत आपने लोकमान्य तिलक के मराठी दैनिक ‘राष्ट्रमत’ के संपादक मंडल में कार्य किया। गंगनाथ भारतीय सर्वविद्यालय, सनातनी ऋषिकुल सिंधु ब्रह्मचर्याश्रम में आचार्य पद पर रहे। शांतिनिकेतन में अध्यापन काल के मध्य आपकी महात्मा गांधी से प्रथम भेंट हुई। गांधीजी ने आपको साबरमती आश्रम की शाला का मुख्याध्यापक बनाया।
गुजरात विद्यापीठ में आप कुलआचार्य व कुलनायक बने तथा गांधी विद्यापीठ के कुलनायक का पद ग्रहण किया। नवजीवन तथा यंग इंडिया का संपादन कार्य भी आपने कुछ समय किया। सत्याग्रह आंदोलनों में आपने पांच बार लंबा कारावास भोगा। तैंतीस वर्ष तक गांधी जी के सान्निध्य में रहे तथा जीवन के 75 वर्ष लोक कार्य को समर्पित किए।
12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य मनोनीत होने के उपरांत राष्ट्रपति ने आपको ‘पद्मविभूषण’ सम्मान से अलंकृत किया। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा से ‘महात्मा गांधी पारितोषिक’ तथा हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा आपको ‘साहित्य वाचस्पति’ की उपाधि प्राप्त हुई। सरदार पटेल विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ तथा गुजरात विश्वविद्यालय ने आपको डी. लिट्. की उपाधि दी। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा विशिष्ट हिंदी साहित्य पुरस्कार प्रदान किया। साहित्य अकादमी ने आपको आजीवन सदस्य मनोनीत किया।
व्युत्पत्ति शास्त्र के विद्वान काकासाहेब कालेलकर ने अंग्रेजी के हजारों शब्दों के पारिभाषिक शब्द भारतीय भाषाओं में रचे। सर्वधर्म समन्वय तथा सांस्कृतिक समन्वय के युग कार्य के प्रति समर्पित काका कालेलकर के लिए धर्म, संस्कृति, राष्ट्रीयता आदि की सीमाएं महत्त्वहीन थीं।