1, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, सन्निधि, राजघाट, नई दिल्ली – 110002

गांधीजी ने उसके लिए ‘रचनात्मक कार्यक्रम’ का प्रारूप तैयार किया, जिसमें सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विषयों के साथ राष्ट्रीय भाषा नीति भी प्रस्तुत की। जिसके अनुसार प्रांतीय भाषाओं के सशक्तिकरण के साथ राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में हिंदी-हिन्दुस्तानी भाषा के संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया गया था।

उन्होंने वर्ष 1942 में उपर्युक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’, वर्धा की स्थापना की। उन्होंने इस कार्य के लिए काकासाहेब कालेलकर को चुना। काकासाहेब ने इसी उद्देश्य को व्यापक रूप देने के लिए 1 सितम्बर, 1955 को ‘गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा’, राजघाट, नई दिल्ली की स्थापना की।

GHSS Sannidhi

संस्था के बारे में

हमारी संस्था राष्ट्र के समग्र विकास हेतु समर्पित एक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संगठन है। गाँधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर, हम भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संवर्धन के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का कार्य करते हैं।

🎯 हमारा मिशन

राष्ट्र के समग्र विकास हेतु राष्ट्रीय भाषिक, साहित्यिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक भावात्मक एकता का पुनर्जागरण और गाँधी विचार के अनुसार मानवीय मूल्यों का उद्बोधन करते हुए एक आदर्श समाज की रचना करना।

👁️ हमारी दृष्टि

भारतीय भाषाओं, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के माध्यम से वैश्विक शांति एवं समृद्धि को बढ़ावा देना।

हमारी प्रमुख गतिविधियाँ

  • भारत की विभिन्न भाषाओं के संरक्षण एवं प्रसार हेतु कार्यक्रम
  • भाषाई एकता पर शोध एवं दस्तावेज निर्माण
  • साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अकादमिक गतिविधियाँ
  • युवा प्रतिभाओं को संगीत एवं साहित्य में प्रोत्साहन
  • ऑनलाइन/ऑफलाइन सर्टिफिकेट कोर्स
  • साहित्यिक पत्रिका एवं ग्रंथों का प्रकाशन
  • गाँधी विचारों का प्रचार-प्रसार
  • भारतीय भाषाओं में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
  • वैश्विक शांति हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रम

हमारी टीम

Kusum Shah

सुश्री कुसुम शाह

अध्यक्षा

Ramesh Chandra Bhardwaj

प्रो० रमेश चन्द्र भारद्वाज

उपाध्यक्ष एवं ट्रस्टी

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